महाराणा कुम्भा ने 1448 ईस्वी में। मालवा के सुल्तान महमूद खिलची द्वारा विजय के उपलक्ष्य में इसे बनवाया था।
ओर इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में व्यापारी जीजा भगेरवाल द्वारा करवाया गया था। जो आदिनाथ तीर्थंकर को समर्पित है।
हालांकि 13वीं शताब्दी में निर्मित यह रानी पद्मिनी का महल है। यह दुर्ग के दक्षिणी पश्चिमी तट पर बना है।
ओर महाराणा कुम्भा द्वारा 15वीं शताब्दी में निर्मित यह महल। जो राजपूती वास्तुकला का अद्भुत नमूना है।
राजा रतन सिंह द्वारा निर्मित यह महल। सुंदर झील के किनारे है। जिससे यह दिखने में ओर भी सुंदर दिखता है।
गौमुख कुंड किले का एक पवित्र जल श्रोत है। जहां गर्मी में सर्दी ओर सर्दी में गर्मी का पानी बहता ह।
मीरा बाई को समर्पित यह मंदिर। जो भगवान् कृष्ण की अनन्य उपासक थी।
8वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर। सूर्यदेव के रूप में था। जहां 14वीं शताब्दी में माता काली की मूर्ति को स्थापित किया गया।
महिलाओं, राजपूत वीरांगनाओं के जौहर के चलते। इस जगह को जौहर का नाम दिया गया। हालांकि इस स्थान पर 3 बार जौहर हुए।